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Move On इस शब्द का मतलब मुझे आज तक समझ नहीं आया, जिस दिन से ये मेरे कानों में पड़े और तुम अचानक से कहीं गुम सी हो गईं। हालांकि अब भी तुमसे मुलाक़ात हो जाती है, जब भी शाम को मुंडेर के सहारे घर के बाहर वाले रास्ते पर अकेला खड़ा होता हूँ, जब भी लिखता हूँ, जब भी गुनगुनाता हूँ। हाँ, बस जब तुम्हारे बारे में सोचता हूँ, तब तुम मेरे साथ नहीं होती। जो मतलब तुम बतला गईं थी "Move On" का, उस पर आज तक अमल न कर पाया हूँ, शायद इस वजह से की किसी ने रिश्तों में "Move On" करना नहीं सिखाया। मैं लाख अपने आप को तसल्ली दे लूँ, लाख सोच लूँ कि तुम जैसे हज़ारों मिलेंगे, बावजूद इसके मैं "Move On" न कर पाया, और शायद कर भी न पाऊं। जाने क्या ढूंढा तुमने मुझमें जो तुम्हें न मिला और तुम "Move On" कर गईं, जाने क्या रह गया तुम्हारा मेरे पास कि मैं "Move On" नहीं कर पाया। और देखो, आज सब ने मुझे बेचारा बना दिया है, फिर भी मैं, कभी कभी ख़ुशी महसूस करता हूँ- "ये जो तुम्हारे न होने की feeling है न, अब इसी से मुझे प्यार हो गया है। इस गम से कि तुम अब कभी लौट कर न आओगी, इसी से मुझे इकरार हो गया है। मज़ा आने लगा है मुझे इस तरह से जीने में, वरना शायद मैं भी "Move On" कर गया होता।" तुम्हारे लिए भले रिश्तों के मायने अलग रहे होंगे या अभी भी तुम रिश्तों को अलग मापदंड में देखती हो पर मेरे लिए रिश्तों की अलग परिभाषा है, मेरे लिए हर रिश्तों के अर्थ अलग रहे है। रिश्ता कभी एकतरफा नही होता, एकतरफा सिर्फ प्यार होता है पर रिश्ता नही! रिश्ता हमेशा दोनो तरह झुका होता है और अगर दोनों तरफ से उसे संभाल नही जाए तो वो एक तरफ के संभालने से नही बचता। रिश्ता कभी एक इंसान के मन के हिसाब से भी चल सकता, कभी ऐसा नही हो सकता है तुम्हारा मन किया और सब सही चल रहा है पर जैसे ही तुम्हे लगा कि सही नही वैसे ही सब ख़त्म...!! रिश्तों में प्यार के साथ विश्वास और संयम जरूरी है।हो सकता है कभी कभी लगता है कि सामने वाले ने रिश्तों को मज़ाक बना लिया या फिर उतना समर्पित नही है जितना आप पर सिर्फ कुछ मैसेजों के रिप्लाई ना देना, कुछ कॉल रिसीव ना करना, कुछ कॉल्स के जवाब ना देना, "कैसे हो/कैसी हो" ना पूछना ये किसी रिश्ते का अंत नही होता। हाँ रिश्ते में एक पड़ाव जरूर हो सकता है पर पड़ाव कभी अंत नही होता प्यार इतना उन्मुक्त नहीं जितना हम जैसे छोटे, अदने लेखकों और शायरों ने अपनी पंक्तियों में इसे बना दिया है, ये उतना ही बंधा हुआ है जितनी की हमारी साँसें बाकी के शरीर से। मैं कितना भी रो लूँ, हंस लूँ और तुम्हारे उस शब्द "Move On" पर अमल कर लूँ, बावजूद इसके जब भी मुझे ये एहसास होगा कि तुम नहीं हो मेरे साथ, मेरे पास, मैं बंधता जाऊंगा।